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Sunday, February 6, 2022

Bandura's Social Learning Theory( बंडूरा का सामाजिक अधिगम सिद्धांत)

 बंडूरा का सामाजिक अधिगम सिद्धांत-

उपनाम-अप्रत्यक्षात्मक अधिगम(Vicarious Learning),अवलोकनात्मक अधिगम(Indirect Experiences)

प्रतिपादक:- अल्बर्ट बंडूरा

निवासी:-कनाडा

जन्म:-1925(4Dec.)

सिद्धान्त दिया:-1977में

-बंडूरा द्वारा किए गए प्रयोग:-बेबीडॉल,जीवित जोकर(फ़िल्म)

-सामाजिक अधिगम का अर्थ:- दूसरों को देखकर उनके अनुरूप व्यवहार करने के कारण व दूसरों के व्यवहार को अपने जीवन में उतारने तथा समाज द्वारा स्वीकृत व्यवहारों को धारण करने तथा अमान्य व्यवहारों  को त्यागने का कारण ही सामाजिक अधिगम कहलाता है।

-इस सिद्धांत में अनुकरण द्वारा ही सीखा जाता है

बंडूरा ने अपने सिद्धांत में 4 पद बताए हैं-

1.अवधान:- निरीक्षणकर्ता का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करने के लिए मॉडल आकर्षक लोकप्रिय रोचक व सफल होना चाहिए।

2.धारण:- व्यक्ति व्यवहारों को अपने मस्तिष्क में प्रतिमानों के रूप में व शाब्दिक वर्णन के रूप में ग्रहण कर लेता है।

3.पुनः प्रस्तुतिकरण:- जिसको हम ध्यान से देख कर धारण करते हैं और धारण करने के बाद मैं उसे पुनः प्रस्तुतीकरण करेंगे।

4.पुनर्बलन: जहां सकारात्मक पुनर्बलन मिलने पर हम उस कार्य को दोबारा करेंगे और नकारात्मक पुनर्बलन मिलने पर हम उस कार्य को पुनः नहीं करेंगे।

- प्रथम इस फिल्म में बालक को सामाजिक मूल्य आधारित पहलू दिखाए गए जिसे देखकर बालक बेबी डॉल के साथ सामाजिक व्यवहार दर्शाता है

- दूसरी यह फिल्म प्रेम पर आधारित थी जिसे देखकर बालक बेबी डॉल से स्नेह करता है उसे सहलाता है।

- तीसरी यह फिल्म हिंसात्मक दृश्य युक्त थी जिसे देखकर बालक गुड़िया की गर्दन को तोड़ देता है।

सामाजिक अधिगम के कारक-(1) अभिप्रेरणा(2)स्वनियंत्रण(3)स्वविवेक(4)स्वनिर्णय(5) स्वानुक्रि सामाजिक अधिगम का शैक्षिक महत्व-

(1) शिक्षक छात्रों के सामने आदर्श विहार वाले मॉडल प्रस्तुत करें।

(2) बुरे व्यवहार उपस्थिति ना होने दें।

(3) स्व नियंत्रण की विधि अपनाएं।


3 comments:

Anshika GK Pathshala said...

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